Tuesday, April 13, 2010
Sambhog Aur Samadhi
सम्भोग जितना सहज और नैसर्गिक है , ध्यान उतना ही कठिन और कृत्रिम ! सम्भोग से प्राप्त आनंद को प्राय: सभी जानते हैं और जब सम्भोग से विरक्ति होती है और मनुष्य उसी आनंद को खोजता हुआ इधर उधर भटकता है , तब कुछ विद्वान् जन उसे ज्ञान देते हैं कि ध्यान लगाओ । ध्यान में परम आनंद है । सम्भोग तो क्षणिक आनंद देता है परन्तु ध्यान स्थायी आनंद देता है । ध्यान सम्भोग का पर्याय कैसे हो सकता है ? एक कितना सहज और सरल , और दूसरा कितना जटिल और उबाऊ ।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment